हरियाणा में कॉरपोरेट नौकरी छोड़कर अपने गांव लौटे धीरज कुमार मौर्य ने 10 किसानों के साथ सिटिब्लॉक एफपीसी की नींव रखी। आज 1,200 से अधिक अन्नदाताओं और 400 महिला शेयरधारकों के साथ एपीडा (APEDA) के मार्गदर्शन में मिलेट कुकीज का निर्माण कर संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया तक निर्यात किया जा रहा है।
आज के दौर में जहां युवा कॉरपोरेट नौकरियों और बड़े शहरों की चकाचौंध की ओर भाग रहे हैं, वहीं मिर्जापुर के एक किसान पुत्र धीरज कुमार मौर्य ने अपनी माटी का कर्ज चुकाने की ठानी। हरियाणा में मैकेनिकल इंजीनियरिंग की शानदार नौकरी छोड़कर धीरज अपने पैतृक गांव दुबरा पहाड़ी (मिर्जापुर, उत्तर प्रदेश) लौटे और यहां के किसानों को संगठित कर मोटे अनाजों (मिलेट्स) का ऐसा साम्राज्य खड़ा किया जिसकी गूंज आज खाड़ी देशों और दक्षिण-पूर्व एशिया तक सुनाई दे रही है।
मोड़: कॉरपोरेट जीवन से पैतृक भूमि की ओर वापसी
हरियाणा की एक प्रतिष्ठित कंपनी में इंजीनियर के रूप में कार्यरत रहते हुए धीरज ने देखा कि शहरी आबादी में डायबिटीज, मोटापा और पोषण की कमी तेजी से बढ़ रही है। लोग महंगे विदेशी सुपरफूड्स खरीद रहे हैं। वहीं उनके गृह जनपद मिर्जापुर और विंध्य क्षेत्र में सदियों से उगाए जाने वाले कोदो, कुटकी, रागी (मड़ुआ), बाजरा और ज्वार जैसे अमृततुल्य अनाज उचित बाजार और मूल्य संवर्धन के अभाव में उपेक्षित पड़े थे।
धीरज बताते हैं, "किसानों को दान या मदद की नहीं, बल्कि अपने उत्पाद का सही दाम और संगठित शक्ति की जरूरत थी।" इसी संकल्प के साथ उन्होंने 2022 में नौकरी से इस्तीफा देकर गांव में सिटिब्लॉक फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड (CFPCL) की स्थापना की।
10 किसानों से 1,200 अन्नदाताओं का सफर: सिटिब्लॉक एफपीसी
शुरुआत आसान नहीं थी। रासायनिक खेती के आदी हो चुके किसानों को प्राकृतिक व जैविक मिलेट की खेती के लिए प्रेरित करना कठिन था। धीरज ने मात्र 10 प्रगतिशील किसानों के साथ शुरुआत की। उन्हें उन्नत बीज उपलब्ध कराए, जैविक खाद का प्रशिक्षण दिया और सबसे महत्वपूर्ण — उनकी उपज की शत-प्रतिशत खरीद की गारंटी दी।
किसानों को जब समय पर उचित भुगतान मिला, तो कारवां बढ़ता गया। आज सिटिब्लॉक एफपीसी से मिर्जापुर, प्रयागराज और सोनभद्र के 1,200 से अधिक किसान सक्रिय रूप से जुड़ चुके हैं।
400 महिला शेयरधारकों का क्रांतिकारी नेतृत्व
News18 की रिपोर्ट में विशेष रूप से रेखांकित किया गया कि कंपनी में 400 से अधिक ग्रामीण महिलाएं शेयरधारक हैं। अनाज की ग्रेडिंग, क्लीनिंग से लेकर बेकरी में रागी और बाजरे के बिस्कुट बनाने का जिम्मा ये मातृशक्ति संभालती हैं, जिससे उन्हें प्रतिमाह ₹8,000 से ₹15,000 की सम्मानजनक आय मिल रही है।
शुद्धता की मिसाल: बिना मैदा, बिना प्रिजर्वेटिव 100% मिलेट बिस्कुट
धीरज मौर्य ने कच्चे अनाज को औने-पौने दाम पर बेचने के बजाय गांव में ही आधुनिक प्रसंस्करण इकाई स्थापित की। यहां विंध्य मिलेट्स ब्रांड के तहत रागी कुकीज, बाजरा बिस्कुट, नमकीन और अनपॉलिश मिलेट्स तैयार किए जाते हैं।
बाजार में मिलने वाले तथाकथित 'डाइजेस्टिव बिस्कुट' में जहां 70% तक मैदा और पाम ऑयल होता है, वहीं विंध्य मिलेट्स के उत्पाद 100% शुद्ध रागी/बाजरा और देसी खांड से तैयार किए जाते हैं। कंपनी अब तक 20 क्विंटल से अधिक बिस्कुट बेच चुकी है।
वैश्विक उड़ान: एपीडा (APEDA) का साथ और दुबई-जकार्ता को निर्यात
सिटिब्लॉक एफपीसी की प्रगति में भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अधीन कार्यरत एपीडा (APEDA) ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वाराणसी के क्षेत्रीय प्रभारी डॉ. सी.बी. सिंह के व्यक्तिगत मार्गदर्शन में कंपनी को अंतरराष्ट्रीय पैकेजिंग और निर्यात मानकों का प्रशिक्षण मिला।
- दुबई (UAE) को निर्यात: मिर्जापुर के किसानों द्वारा तैयार मिलेट बिस्कुट की खेप सीधे संयुक्त अरब अमीरात भेजी गई।
- आसियान-भारत मिलेट महोत्सव (जकार्ता, इंडोनेशिया): धीरज मौर्य ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर उत्तर प्रदेश के किसान समुदाय का प्रतिनिधित्व किया।
- कृषि यंत्रीकरण बैंक: उत्तर प्रदेश कृषि विभाग के सहयोग से आधुनिक क्लीनर, डी-हलर व पैकिंग मशीनें स्थापित की गईं।
News18 की राष्ट्रीय रिपोर्ट: युवाओं के लिए नई दिशा
News18 हिंदी की राष्ट्रीय बिजनेस रिपोर्ट "नौकरी छोड़ युवक ने शुरू किया यह स्टार्टअप, आज विदेशों में भी भारी मांग, बन गया लखपति" प्रसारित होने के बाद देशभर से किसानों, व्यापारियों और स्टार्टअप्स के फोन आने लगे। इस रिपोर्ट ने साबित कर दिया कि अपनी माटी से जुड़कर भी अंतरराष्ट्रीय स्तर का उद्यम खड़ा किया जा सकता है।
News18 आधिकारिक मीडिया स्रोत लिंक
यह आलेख News18 हिंदी (नेटवर्क18 मीडिया) द्वारा 11 जून 2024 को प्रकाशित राष्ट्रीय खोजी रिपोर्ट के तथ्यों पर आधारित है।
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